आँखें

एक सुंदर संसार नजर आता है।

ये उज्जवल सी आँखे,

उसमे विस्मय पर विश्वास नज़र आता है।

ये आँखें,

जो मंजिल दिखलाती हैं।

बर्फ की धवल कुंडो में,

पावन जल राशि सी

जीवन संघर्ष विस्मृत कर,

मन मदमस्त कर जाती हैं।

ये आँखें,

ऐसे सपने भी देखती हैं,

चमक आ जाती है इनमें

जब ये साकार होता देखती हैं

ये आँखें ,

गहरा,

शांत ,

अनंत समुद्र सा नज़र आती है।

देखो जितनी बार इनसे सपना

हर बार एक नया रूप उभरा कर लाती है।

ये आखें

स्वप्निल आँखें …!!!!

स्वेता निक्की परमार

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