सृजन

दुनिया से बेख़बर

मीठी जीत लिए चले हमसफ़र

छोटी सी दुनिया का ख़्वाब लिए

इक दूजे का हाथ थामे हुए

चल तो दिए सफ़र पर

सोच लिया करेंगे सृजन

इक नयीं ज़मीं पर

आँखों में लिए स्वप्न

माना मुश्किल होगी राह बहुत

पर प्यार और वफ़ा से हैं दोनो बने सख़्त

इस जहाँ में न जगह दी किसी ने

रसवैयों तले दोनो हैं लिप्त

फिर भी सबसे परे सुंदर स्वप्निल संसार ही बसाया

करके इक दूसरे को सम्पूर्ण और दिप्त

ना शिकवा, ना शिकायत, ना ग़ुस्सा किसी से

बस वफ़ा के ख़ुमार में

अपने संसार में बस

हैं दोनों आह्लादित आनंदित

जब गूँजी किलकारी उनके आँगन में

हुआ सृजन प्रेम का कुसुमित

पुलकित हुए दोनों पाकर

एक नहीं दो दीप हुए प्रज्वलित

हुआ ‘स्वास’ और ‘तासु’ का प्रवेश

कर गया उनको सम्पूर्ण समर्पित

छोटी सी दुनिया, संसार अद्वितीय

संसार में किन्तु………संसार से परे

अलौकिक !!!!!!!

स्वेता निक्की

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