ए दिल बता…!!!!!

सच छिपाने से होगा क्या फ़ायदा

ज़रा इतनी सी बात तो मुझे ए दिल बता

छल करने से मिलेगा क्या फ़ायदा

सोच समझ और फिर ए दिल मुझे तू बता

जो हिस्सा है तू मेरा और मैं भी तुझ बिन हूँ कहाँ

फिर कैसे ये हो रहा कि तू मुझसे हुआ ऐसे ख़फ़ा

क्यूँ है ज़रा सा भी ये फ़ासला अब

बहुत सोचा पर नहीं है पता

बस जानती हूँ इतना कि तेरे बिन मैं नहीं

चाहे दर्द दे तू बेंतेहां

पर …… मैं तुझसे ही हूँ बस ज़िंदा

सांसें मेरी जो लेती हूँ ….तुझसे है

ये जान ……..ये धड़कन

ये हँसी………ये सिहरन

ये उनिंदी सी पलकें कभी

तो कभी फाँदती हिरणी सी

मैं …….. बस तुझसे हूँ

हाँ…….इतना है पता

फिर ….

सच छिपाने से होगा क्या फ़ायदा

ज़रा इतनी सी बात तो मुझे ए दिल बता

………….. बता ना !!!!!!

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