क़ब्र

जिस ज़मीं पर कभी सिर्फ़ हक़ था मेरा 

आज वहीं मकान हैं किसी और का 

ए मालिक मेरे …..तूने कैसे मिलाया ख़ाक में

मेरी क़ब्र खोद दफ़ना दिया मुझे वहीं 

जहाँ रोशन हुए गुल ….किसी और के साथ

जो कभी थे मेरे……..ख़्वाब के !

Article written by

Published Author

Please comment with your real name using good manners.

Leave a Reply

shopify site analytics