प्यार!

सुना था प्यार सिर्फ़ एक इंसान से होता है जिसे चाहने के बाद सब कुछ बेगाना लगता है । बस एक ही शख़्स पर सांसें अटक जाती है , वही ज़िंदगी बन जाता है , वही दुनिया में जीने का कारण। फिर ना किसी और रिश्ते की ज़रूरत नहीं पड़ती। पर क्या वाक़ई आज के ज़माने में कोई ऐसा निश्चल किसी से प्यार कर सकता है?!?!?!?!?शायद जिसे शिद्दत कहते हैं लोग वो मात्र एक भुलवा है ख़ुद को तसल्ली देने का क्यूँकि ऐसा कुछ होता नहीं। कभी ख़ुद पर भरोसा होता है की पत्थर को भी पिघल सकते हैं अपने प्यार से पर ऐसा आज के युग में सम्भव नहीं। सब अपनी ज़िंदगी अपने हिसाब से जीते हैं । प्यार भी आजकल हिसाब से ही होता है । हर रिश्ते सहूलियत के अनुसार निभाए जाते हैं। प्यार से बढ़कर बहुत कुछ हो गया है आज। कहना आसान है की किसी के बिना मुश्किल है जीना पर ऐसा होता नहीं है। बल्कि मैंने तो लोगों को ज़्यादा ख़ुश देखा है क्यूँकि तब वो ज़्यादा आराम और अचेबे से जी सकते हैं। आज के ज़माने में रांझा या मजनूँ या रोमीओ या महिवाल सरीखे लोग नहीं होते जिनके लिए बस एक हीर या लैला या सोहनी या जूलीएट जी हो।आज सबको बहुत कुछ चाहिए ल एक साथ बैठने को , घूमने को, बातें करने को , अपनी हर इक हाँ पूरी करने को चाहिए , अपना वक़्त गुज़ारने के लिए साथी चाहिए जो वो नहीं हो सकता जिसे आप प्यार करते हो क्यूँकि आज प्यार के साथ आप अधूरे हो शायद अकेले हो । मौज मस्ती के लिए तो कोई और हर चाहिए होती है । और शारीरिक सम्बन्धों के लिए कोई और । आज के इंसान को फ़र्क़ नहीं पड़ता की वो सिर्फ़ एक का होके रह पाए । उसका शरीर , दिल , आत्मा सब एक टैक्सी की तरह हो गया है जिससे बहुत लोग सवार रह सकते हैं। प्यार अब सिर्फ़ प्यार नहीं रह गया है बल्कि अपनी तृष्णा और लालसाओं की पूर्ति का एक ज़रिया बन गया है। आज के समय में प्यार का कोई वजूद नहीं , इंसान ख़ुद आपे आप को धोखा दे रहा है । आज वो किसी एक का होके नहीं रह सकता। पर शायद कोई तो होगा जिसके लिए प्यार का मतलब वाक़ई …..प्यार ही होगा। मज़ाक नहीं….?!!!!!!!!!!!!

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